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PSU कंपनियों में हिस्सेदारी क्यों बेच रही सरकार? जानिए क्या है विनिवेश की रणनीति
ताजा खबरें 8 16 hours ago

पिछले कुछ महीनों में केंद्र सरकार ने कई सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर हजारों करोड़ रुपये जुटाए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने Central Bank of India, Coal India, BHEL और NHPC जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री के जरिए 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक जुटाए हैं। इसके अलावा कई अन्य सरकारी कंपनियों में भी OFS (Offer for Sale) और IPO लाने की तैयारी चल रही है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार को पैसों की कमी हो गई है या फिर देश की अर्थव्यवस्था किसी बड़ी चुनौती का सामना करने वाली है? हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा नहीं है।

सरकार हिस्सेदारी क्यों बेचती है?

सरकार हर साल सड़क, रेलवे, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर भारी खर्च करती है। इन परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से सरकार विनिवेश यानी सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचती है। इससे सरकार को बिना नया टैक्स लगाए अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होता है।

राजकोषीय घाटा कम करने में मदद

जब सरकार का खर्च उसकी आय से अधिक हो जाता है तो राजकोषीय घाटा बढ़ता है। ऐसे में विनिवेश से मिलने वाली राशि घाटे को नियंत्रित करने में मदद करती है और सरकारी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाती है।

SEBI के नियम भी एक बड़ी वजह

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में कम से कम 25 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी होना आवश्यक है। कई सरकारी कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से अधिक है। इसलिए समय-समय पर हिस्सेदारी बिक्री जरूरी हो जाती है।

बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने का प्रयास

जब अधिक शेयर बाजार में उपलब्ध होते हैं तो निवेशकों के लिए खरीद-बिक्री आसान हो जाती है। इससे ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ता है और कंपनी के शेयरों में बेहतर मूल्य निर्धारण संभव हो पाता है।

बाजार में गिरावट के बीच बढ़ी चिंता

आमतौर पर सरकार तब OFS या IPO लाती है जब शेयर बाजार मजबूत स्थिति में होता है। लेकिन इस बार सरकार ऐसे समय हिस्सेदारी बेच रही है जब बाजार दबाव में है और निफ्टी-सेंसेक्स में हाल के महीनों में गिरावट देखने को मिली है। इससे सरकार को अपेक्षाकृत कम कीमत पर हिस्सेदारी बेचनी पड़ सकती है।

किन कंपनियों पर रहेगी नजर?

बाजार की नजर अब उन कंपनियों पर है जिनमें सरकार भविष्य में हिस्सेदारी बेच सकती है। इनमें LIC, IRFC, IRCTC, REC, Indian Overseas Bank और Bank of Maharashtra जैसे नाम प्रमुख हैं। इसके अलावा Export Credit Guarantee Corporation (ECGC) और India Infrastructure Finance Company Limited (IIFCL) के IPO की भी चर्चा है।

सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 में विनिवेश के जरिए 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का है। अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में सरकार इस लक्ष्य के कितने करीब पहुंच पाती है।

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