USA ने India समेत 60 देशों पर Section 301 Tariff लागू करने का बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि USTR (United States Trade Representative) ने गुरुवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि जिन देशों ने Forced Labour (जबरन मजदूरी) से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक नहीं लगाई या उसे सही तरीके से लागू नहीं किया, उन पर यह कार्रवाई की गई है।
इस फैसले के तहत India को 10% Tariff वाले समूह में रखा गया है। अमेरिका का कहना है कि इसका उद्देश्य वैश्विक सप्लाई चेन से Forced Labour से जुड़े उत्पादों को बाहर करना और व्यापारिक साझेदार देशों को सख्त नियम लागू करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
USTR के अनुसार यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के निर्देश पर शुरू की गई जांच के आधार पर की गई है। जांच में यह परखा गया कि अलग-अलग देशों ने Forced Labour से बने सामान के आयात को रोकने के लिए कितने प्रभावी कदम उठाए हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer ने कहा कि केवल अपील और बातचीत से वैश्विक सप्लाई चेन से Forced Labour समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका लगभग 100 वर्षों से ऐसे उत्पादों के आयात पर रोक लागू करता आ रहा है और चाहता है कि उसके सभी व्यापारिक साझेदार भी इसी दिशा में ठोस कदम उठाएं।
कैसे हुई पूरी जांच?
इस मामले की जांच 12 मार्च 2026 को शुरू हुई थी। इसके बाद कई चरणों में प्रक्रिया आगे बढ़ी।
28 और 29 अप्रैल को सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की गई।
45 से अधिक देशों की सरकारों के साथ चर्चा हुई।
2 जून को USTR ने इसे Section 301(b) के तहत कार्रवाई योग्य माना।
इसके बाद दोबारा सुझाव मांगे गए, जिन पर 1,600 से अधिक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं।
7 से 9 जुलाई के बीच अंतिम सुनवाई हुई, जिसमें 100 से ज्यादा लोगों ने अपनी गवाही दी।
क्या सभी उत्पादों पर लगेगा Tariff?
नहीं। USTR ने कुछ महत्वपूर्ण श्रेणियों को इस टैरिफ से छूट भी दी है।
इनमें शामिल हैं:
ऐसे Raw Materials जिन पर टैक्स लगाने से अमेरिका की घरेलू सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
ऐसे उत्पाद जो अमेरिका में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं।
India समेत कुछ देशों के चुनिंदा उत्पाद, जहां छूट देकर Forced Labour नियमों के बेहतर पालन को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत को 10% Tariff वाले समूह में रखा गया है। इससे भारतीय निर्यात के कुछ क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ उत्पादों को दी गई छूट और अपेक्षाकृत कम टैरिफ दर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए राहत का संकेत भी हो सकती है।
आने वाले समय में India-US Trade वार्ता और इस फैसले के आर्थिक प्रभाव पर सभी की नजर रहेगी।
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