अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों को लेकर एक संशोधित बिल पेश किया गया है, जिसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है। इस बिल में रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों—भारत, चीन, हंगरी, स्लोवाकिया और अज़रबैजान—से आयात होने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।
भारत फिलहाल अपनी कच्चे तेल की लगभग आधी जरूरत रूस से पूरी करता है। जून महीने में भारत ने रिकॉर्ड 25.8 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चे तेल का आयात किया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। रूस से मिलने वाला रियायती तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए सबसे किफायती विकल्प माना जा रहा है।
संशोधित बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित के आधार पर इन प्रतिबंधों में छूट देने का अधिकार भी दिया गया है। भारत सरकार का कहना है कि यह प्रस्ताव भारत-अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता का हिस्सा नहीं है और दोनों देशों के बीच टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर अलग से बातचीत जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव कानून बनता है और रूस के तेल निर्यात पर सख्ती बढ़ती है, तो वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे भारत जैसे बड़े आयातक देशों की लागत भी बढ़ सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत के लिए रूस की जगह किसी अन्य देश से समान मात्रा में किफायती तेल हासिल करना आसान नहीं होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में इस बिल और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर वैश्विक बाजार की नजर बनी रहेगी।
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