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AI पर बढ़ती निर्भरता छात्रों के लिए खतरा? IIT Alumni की पोस्ट ने छेड़ी नई बहस
ताजा खबरें 6 1 day ago

Artificial Intelligence (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक IIT एलुमनाई और स्टार्टअप फाउंडर की सोशल मीडिया पोस्ट ने नई बहस को जन्म दे दिया है। IIT स्नातक और उद्यमी देवांश भंडारी ने छात्रों को चेतावनी देते हुए कहा है कि AI का इस्तेमाल सीखने के लिए करें, लेकिन उसे सीखने का विकल्प न बनने दें।

देवांश भंडारी की पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हो गई है। उन्होंने अपने प्रोग्रामिंग सीखने के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि वर्ष 2020 में, जब AI कोडिंग असिस्टेंट्स आम नहीं थे, तब एक छोटी सी बग को ठीक करने में 30 से 40 मिनट तक लग जाते थे। इस दौरान डॉक्यूमेंटेशन पढ़ना, ऑनलाइन रिसर्च करना और अलग-अलग समाधान आजमाना पड़ता था।

भंडारी का कहना है कि यही संघर्ष उन्हें बेहतर डेवलपर बनाने में मददगार साबित हुआ। उन्होंने कहा कि समस्याओं को खुद हल करने की प्रक्रिया ने उनकी तकनीकी समझ मजबूत की और उन्हें करियर में आगे बढ़ने में मदद मिली।

आज AI टूल्स कुछ ही सेकंड में कोड लिख सकते हैं, असाइनमेंट तैयार कर सकते हैं और जटिल अवधारणाओं को समझा सकते हैं। इससे छात्रों की उत्पादकता जरूर बढ़ी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा AI पर निर्भरता विश्लेषणात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता को कमजोर कर सकती है।

देवांश भंडारी ने छात्रों को सलाह दी कि वे AI को एक सहायक उपकरण की तरह इस्तेमाल करें, लेकिन हर समस्या का समाधान AI से पूछने की आदत न बनाएं। उनका मानना है कि वास्तविक सीख तभी होती है जब व्यक्ति स्वयं चुनौतियों का सामना करता है।

इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी बड़ी चर्चा देखने को मिली। कई डेवलपर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि AI कई बार संभावित समाधान सुझा देता है, लेकिन सही समस्या की पहचान और अंतिम निर्णय लेने के लिए मानवीय समझ और अनुभव की आवश्यकता होती है।

AI के बढ़ते प्रभाव के बीच यह बहस अब और तेज हो गई है कि तकनीक का उपयोग सीखने को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए या फिर वह छात्रों की मूलभूत क्षमताओं को प्रभावित कर रही है।

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