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Tata Trusts विवाद: Noel Tata और Neville Tata ने Bombay High Court में दाखिल की Caveat
बिज़नेस 2 5 hours ago

Tata Trusts में प्रशासन और शासन व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इसी बीच चेयरमैन Noel Tata और उनके बेटे Neville Tata ने Bombay High Court में Caveat दाखिल की है। इससे पहले दोनों ने 7 अक्टूबर 2026 को Mumbai City Civil Court में भी इसी तरह की कानूनी प्रक्रिया अपनाई थी। यह जानकारी NDTV Profit की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है।
Caveat दाखिल करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित मामले में अदालत कोई आदेश पारित करने से पहले उनकी बात भी सुने। हालांकि, Caveat दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने किसी पक्ष के पक्ष या विपक्ष में फैसला सुना दिया है।
Venu Srinivasan और Vijay Singh की शिकायत से जुड़ा है मामला
यह विवाद Sir Dorabji Tata Trust (SDTT) के प्रशासन और शासन व्यवस्था से जुड़े आरोपों के बीच सामने आया है। ट्रस्टी Venu Srinivasan और Vijay Singh ने Maharashtra Charity Commissioner के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में ट्रस्ट के कामकाज और Tata Sons से जुड़े कुछ लेनदेन में उसकी भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, Noel Tata और Neville Tata की ओर से दाखिल Caveat में सह-ट्रस्टी Venu Srinivasan, Vijay Singh, Darius Khambata और Bhaskar Bhat के नाम शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, Khambata और Bhat को शामिल करना प्रक्रियात्मक कदम है।
Tata Trusts को जवाब दाखिल करने के लिए मिली अतिरिक्त समयसीमा
Maharashtra Charity Commissioner ने मंगलवार को Tata Trusts को शिकायत पर जवाब देने के लिए 19 अक्टूबर तक का अतिरिक्त समय दिया। इससे पहले जवाब दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर थी।
सितंबर के अंत में Venu Srinivasan ने SDTT के प्रशासन और शासन व्यवस्था की तत्काल जांच की मांग की थी। उन्होंने Circular Resolution No. 107 पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इस कदम से ट्रस्टियों की स्वतंत्र राय और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि ट्रस्ट के भीतर निर्णय लेने की शक्ति सीमित समूह में केंद्रित करने की कोशिश की गई। हालांकि, ये शिकायतकर्ता के आरोप हैं और इन पर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
Perpetual Trustee की नियुक्ति पर भी सवाल
विवाद का एक अहम पहलू Perpetual Trustee की नियुक्ति और Maharashtra Public Trusts Act में 2025 में हुए संशोधन से जुड़ा है। शिकायत में यह सवाल उठाया गया है कि क्या संशोधित कानून के तहत ऐसी नियुक्ति वैध बनी रहती है।
इसके अलावा, Tata Sons के निदेशक के रूप में किसी ट्रस्टी के स्वतंत्र निर्णय और मतदान के अधिकार को लेकर भी कानूनी सवाल उठाए गए हैं। इन मुद्दों पर संबंधित प्राधिकरण और अदालतों की आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
Tata Sons IPO विवाद से भी जुड़ा है मामला
Tata Trusts का यह विवाद Tata Sons की संभावित IPO लिस्टिंग को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच सामने आया है। Tata Trusts के पास Tata Sons की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि Shapoorji Pallonji Group के पास करीब 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
Shapoorji Pallonji Group लंबे समय से Tata Sons की सार्वजनिक लिस्टिंग की मांग करता रहा है। दूसरी ओर, Noel Tata तत्काल IPO के बजाय दूसरे विकल्पों पर विचार करने के पक्ष में बताए जाते हैं।
यह बहस Tata Sons की स्वामित्व संरचना, नियामकीय आवश्यकताओं और Tata Group के परोपकारी कार्यों के वित्तपोषण से भी जुड़ी है। फिलहाल Tata Trusts से संबंधित शिकायत पर जवाब और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

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