देश में मानसून की धीमी रफ्तार ने चिंता बढ़ा दी है। वर्ष 2026 का जून महीना पिछले 126 वर्षों के इतिहास में दूसरा सबसे सूखा जून साबित हो रहा है। मौसम से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, 21 जून तक केवल 57.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य औसत से 42.2 प्रतिशत कम है।
बारिश की इस बड़ी कमी ने किसानों, जल संसाधनों और मौसम विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। जून के अधिकांश दिनों में कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई, जिसका असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी पड़ सकता है।
इससे पहले वर्ष 2009 में जून महीने के दौरान सामान्य कोटे से 49 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, जो अब तक का सबसे सूखा जून माना जाता है। वर्ष 2026 का जून अब उस रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियां तेज नहीं हुईं, तो कृषि क्षेत्र और जल भंडारण पर इसका असर देखने को मिल सकता है। हालांकि मौसम विभाग को उम्मीद है कि जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई की शुरुआत में बारिश की गतिविधियों में तेजी आ सकती है।
फिलहाल, जून 2026 देश के मौसम इतिहास में सबसे कम बारिश वाले वर्षों में शामिल हो गया है।
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