पहलगाम… अब सिर्फ एक खूबसूरत वादी नहीं,
बल्कि एक ऐसा ज़ख्म है, जिसे वक्त भी नहीं भर पाया…
एक साल बीत गया… लेकिन उस दिन आतंकियों की बर्बरता ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था।
बेगुनाहों की चीखें, खून से सनी वो ज़मीन… आज भी रूह को झकझोर देती है।
किसी का बेटा, किसी का भाई, किसी का पूरा संसार छिन गया… और हम बस उस मंजर को याद कर आज भी सिहर उठते हैं।
22 अप्रैल 2025… ये तारीख सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि दर्द, आंसू और अपनों के खोने की अनगिनत कहानियों का नाम है…
बेबसी तड़पती सांसों का अंजाम आज भी याद है, और हमेशा रहेगा… जब तक मैं भारतीय हूं, पहलगाम हमेशा याद रहेगा।
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