भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने कृषि व्यापार और मंडी व्यवस्था को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंडी शुल्क नीति में महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी गई। नए फैसले के तहत कपास कारोबारियों को राहत देते हुए कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क में कमी करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का मानना है कि इस कदम से प्रदेश में कपास व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और किसानों के साथ-साथ व्यापारियों को भी लाभ होगा। लंबे समय से कपास कारोबार से जुड़े व्यापारी मंडी शुल्क में राहत की मांग कर रहे थे, जिसे अब सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
कपास पर राहत देने के साथ ही सरकार ने अन्य कृषि उपजों पर मंडी शुल्क में 50 पैसे प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इससे मंडियों की आय में वृद्धि होगी और मंडी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
राज्य सरकार के अनुसार यह निर्णय किसानों, व्यापारियों और मंडी समितियों के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से कृषि व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा और मंडी प्रणाली को अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि कपास पर शुल्क में कमी से प्रदेश के कपास उत्पादक किसानों और व्यापारियों को प्रतिस्पर्धी बाजार का लाभ मिल सकता है। वहीं अन्य कृषि उपज पर मामूली शुल्क वृद्धि से मंडियों के संचालन और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलेगी।
मध्य प्रदेश सरकार का यह फैसला कृषि व्यापार और मंडी प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में किसानों और व्यापारियों दोनों पर देखने को मिल सकता है।
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