पंजाब की राजनीति में एक बार फिर अकाल तख्त चर्चा के केंद्र में है। इसकी वजह आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा पारित जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 है। अकाल तख्त ने इस कानून की कुछ धाराओं पर आपत्ति जताते हुए पंजाब सरकार को एक महीने के भीतर संशोधन करने का अल्टीमेटम दिया है।
इससे पहले अकाल तख्त के समन पर 78 सिख विधायक और 9 सिख मंत्री उसके समक्ष पेश हुए। यह घटनाक्रम पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक संस्थाओं के बीच अकाल तख्त के प्रभाव को एक बार फिर सामने लाता है।
29 अप्रैल 2026 को पंजाब विधानसभा ने यह संशोधन कानून पारित किया था। इसमें गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की परिभाषा का दायरा बढ़ाकर धार्मिक भावनाएं आहत करने तक कर दिया गया है। साथ ही दोषी पाए जाने पर कठोर कारावास का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
अकाल तख्त का कहना है कि कानून की कुछ धाराएं स्पष्ट नहीं हैं और भविष्य में उनका दुरुपयोग हो सकता है। इसलिए सरकार से इन प्रावधानों में संशोधन करने की मांग की गई है।
अमृतसर स्थित अकाल तख्त सिख धर्म की सर्वोच्च सांसारिक संस्था मानी जाती है। इसकी स्थापना छठे सिख गुरु गुरु हरगोबिंद साहिब ने 17वीं शताब्दी में की थी। हालांकि अकाल तख्त के पास कोई कानूनी या प्रशासनिक शक्ति नहीं है, लेकिन सिख समुदाय में उसकी धार्मिक और नैतिक स्वीकार्यता के कारण उसके निर्णयों का व्यापक प्रभाव पड़ता है।
इतिहास में कई बड़े राजनीतिक और धार्मिक नेताओं को अकाल तख्त के समक्ष पेश होना पड़ा है। हाल के वर्षों में भी कई नेताओं को धार्मिक अनुशासन के तहत सार्वजनिक माफी और सेवा करने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल पंजाब सरकार और अकाल तख्त के बीच इस कानून को लेकर मतभेद बने हुए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार तय समय सीमा के भीतर कानून में संशोधन करती है या नहीं।
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