देश में महंगाई लगातार लोगों की जेब पर असर डाल रही है। हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में खुदरा (रिटेल) महंगाई दर बढ़कर 3.93 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 3.5 प्रतिशत थी। वहीं खाद्य महंगाई 4.8 प्रतिशत और थोक महंगाई 9.68 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में भारत में औसत महंगाई दर 5 से 7 प्रतिशत के बीच रही है। इसका सीधा असर लोगों की क्रय शक्ति पर पड़ा है। जो वस्तु वर्ष 2016 में 100 रुपये में मिलती थी, उसकी कीमत आज लगभग 150 से 170 रुपये तक पहुंच चुकी है।
2016 में 100 रुपये में करीब 2 लीटर दूध और ब्रेड, 1.5 लीटर पेट्रोल, 4 से 5 किलो आटा या एक मूवी टिकट खरीदी जा सकती थी। लेकिन 2026 में वही 100 रुपये केवल 1 लीटर पेट्रोल, साधारण नाश्ता, 1-2 कप चाय-कॉफी या 1 लीटर दूध और ब्रेड तक सीमित हो गए हैं।
बढ़ती महंगाई का सबसे बड़ा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर पड़ता है, क्योंकि उनकी आय में उतनी तेजी से वृद्धि नहीं हो पाती जितनी तेजी से वस्तुओं और सेवाओं के दाम बढ़ते हैं।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि महंगाई पर नियंत्रण और आय में वृद्धि दोनों ही आम लोगों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए जरूरी हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लोगों की कमाई महंगाई की रफ्तार से बढ़ रही है या फिर खर्चों की दौड़ में पीछे छूट रही है?
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