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राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शनकारियों ने सुनाई आपबीती, पुलिस पर मारपीट के आरोप
राजनीति 2 3 hours ago

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कुछ प्रदर्शनकारियों को सामने लाकर उनकी आपबीती सुनी और पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने इस दौरान समर नाम के एक बांसुरी वादक को भी पेश किया, जिसने बांसुरी पर ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ भजन की धुन बजाई। इसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित ‘डंडे’ के इस्तेमाल के जवाब में एक प्रतीकात्मक प्रस्तुति के तौर पर पेश किया गया।
समर ने हिरासत और मारपीट के लगाए आरोप
समर ने दावा किया कि उन्हें 11 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। उनके मुताबिक, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को कुछ लोगों ने धमकाया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके फोन छीनकर फॉर्मेट कर दिए गए और पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की।
समर ने यह भी दावा किया कि इससे पहले 20 जुलाई को एक रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान ने उन्हें डंडे से मारा था। ये आरोप समर के बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
NSUI की महिला कार्यकर्ता ने भी लगाए गंभीर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने NSUI की एक महिला पदाधिकारी को भी पेश किया। महिला कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने महिला कांस्टेबल चंचल यादव पर उन्हें घसीटने, थप्पड़ मारने और बाल खींचने का आरोप लगाया।
महिला के मुताबिक, घटना के दौरान उनके चेहरे और कान के पास चोटें आईं। उन्होंने दावा किया कि कान में पहनी बाली चोट के कारण फंस गई थी, जिसे बाद में अस्पताल में डॉक्टरों ने निकाला।
महिला कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि बस में और पुलिस स्टेशन के भीतर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने दावा किया कि उनकी एक सहकर्मी तीरा के साथ भी मारपीट हुई और उन्हें सड़क पर घसीटा गया।
प्रदर्शन के दौरान बस रोकने की कोशिश का दावा
महिला प्रदर्शनकारी ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बस रोकने और उसके नीचे बैठकर प्रदर्शन जारी रखने की कोशिश की थी। उनके अनुसार, इसी दौरान पुलिसकर्मियों के साथ टकराव हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस स्टेशन में भी उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें राजनीतिक नेतृत्व के बारे में पूछते हुए धमकाया गया। महिला ने दावा किया कि इस कार्रवाई में कई लोग शामिल थे।
पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हिरासत के दौरान मारपीट और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पुलिस का आधिकारिक पक्ष शामिल नहीं है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। इसलिए मामले में सभी तथ्यों और संबंधित पक्षों के बयान सामने आना जरूरी है।
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। अब इन आरोपों पर पुलिस की प्रतिक्रिया और किसी आधिकारिक जांच की स्थिति पर नजर रहेगी।

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