NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक इस तरह की समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में निर्धारित की है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस मामले की निगरानी कर रहे हैं।
इस बीच राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने अदालत में दायर अपने हलफनामे में दावा किया है कि NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद और परीक्षा रद्द होने के बाद एजेंसी ने व्यापक सुरक्षा और संरचनात्मक सुधार लागू किए हैं।
याचिका में NTA के पुनर्गठन और परीक्षा संचालन प्रणाली में बड़े बदलाव की मांग की गई है। यह याचिका फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) द्वारा दायर की गई है।
NTA ने अपने हलफनामे में बताया कि NEET-UG 2026 के 99.5 प्रतिशत परीक्षा केंद्र सरकारी संस्थानों में बनाए गए थे। साथ ही सभी परीक्षा केंद्रों पर CCTV निगरानी, 90 दिनों तक फुटेज सुरक्षित रखने, मॉक ड्रिल, बिजली बैकअप की जांच, मेडिकल सुविधाओं की उपलब्धता और परीक्षा के बाद CCTV फुटेज की फॉरेंसिक जांच जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
एजेंसी ने यह भी बताया कि परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 16 नए वरिष्ठ पद सृजित किए गए हैं। IIT, UGC, CBSE, KVS और IGNOU के विशेषज्ञों को भी परीक्षा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ा गया है।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि NTA की जगह एक नई, स्वायत्त और तकनीकी रूप से मजबूत संस्था बनाई जाए, जो भविष्य में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं का संचालन करे। साथ ही न्यायिक निगरानी में परीक्षा कराने और राष्ट्रीय परीक्षा अखंडता आयोग (NEIC) के गठन की भी मांग की गई है।
गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी। अब पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। इस मामले ने देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
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