भारतीय संगीत जगत को एक और बड़ा झटका लगा है। प्रसिद्ध पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का 31 मई 2026 को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से हिंदी और मराठी संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। अपनी मधुर, भावपूर्ण और सुरेली आवाज़ के लिए पहचानी जाने वाली सुमन कल्याणपुर ने छह दशकों से अधिक समय तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया।
सुमन कल्याणपुर ने अपने करियर की शुरुआत 1954 में फिल्मों ‘शुक्राची चांदणी’ और ‘मांगू’ से की थी। इसके बाद उन्होंने कई यादगार गीतों को अपनी आवाज़ दी, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
उनके प्रसिद्ध गीतों में ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार’, ‘ना तुम हमें जानो’, ‘परबतों के पेड़ों पर’, ‘शराबी शराबी ये सावन का मौसम’ और ‘निंबोणिच्या झाडा मागे’ जैसे कालजयी गीत शामिल हैं।
सुमन कल्याणपुर और महान गायक मोहम्मद रफ़ी की जोड़ी को संगीत प्रेमियों ने खूब पसंद किया। दोनों ने मिलकर कई सुपरहिट गीत दिए, जो आज भी सदाबहार गीतों की सूची में शामिल हैं।
सुमन कल्याणपुर के निधन पर कई राजनीतिक और सांस्कृतिक हस्तियों ने दुख व्यक्त किया।
वरिष्ठ नेता Sharad Pawar ने कहा कि सुमन कल्याणपुर की मधुर और आत्मा को छू लेने वाली आवाज़ ने भारतीय संगीत को समृद्ध किया। उनके गीत पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे।
वहीं Devendra Fadnavis ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सुमन कल्याणपुर के निधन से भारतीय संगीत जगत की एक अमूल्य धरोहर हमेशा के लिए शांत हो गई है। उनकी आवाज़ और गीत सदैव याद किए जाएंगे।
सुमन कल्याणपुर की आवाज़ की तुलना अक्सर महान गायिका Lata Mangeshkar से की जाती थी। कई बार श्रोता दोनों की आवाज़ में अंतर नहीं कर पाते थे। इसके बावजूद सुमन कल्याणपुर ने अपनी अलग पहचान बनाई और संगीत की दुनिया में एक विशिष्ट स्थान हासिल किया।
सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को तत्कालीन अविभाजित भारत के ढाका में हुआ था। उनका मूल नाम सुमन हेम्माडी था। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध Sir J. J. School of Art में दाखिला लिया था, जहां वे चित्रकला की पढ़ाई कर रही थीं।
हालांकि बाद में उनका रुझान संगीत की ओर बढ़ा और उन्होंने पंडित केशवराव भोले, उस्ताद खान अब्दुल रहमान खान और मास्टर नवरंग जैसे गुरुओं से संगीत की शिक्षा प्राप्त की।
सुमन कल्याणपुर ने हिंदी, मराठी, बंगाली, ओड़िया सहित कई भाषाओं में हजारों गीत गाए। फिल्मी गीतों के अलावा उन्होंने भजन, ग़ज़ल, अभंग और भावगीतों में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी।
उनके निधन के साथ भारतीय संगीत के स्वर्णिम युग का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है। संगीत प्रेमी हमेशा उनकी मधुर आवाज़ और अमर गीतों को याद रखेंगे।
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