CBSE के हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी स्कैन कॉपी, किसी बोर्ड में ऐसा कभी नहीं हुआ, क्या कुछ बड़ा होने वाला है?केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की इस साल की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के परिणाम से असंतुष्ट छात्रों का गुस्सा अब देश के इतिहास के सबसे बड़े रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है. छात्रों और पेरेंट्स की परेशानी और मूल्यांकन प्रणाली से विश्वास उठना और बोर्ड पर अचानक आया इतना प्रेशर कहीं ये इशारा तो नहीं कि सीबीएसई बोर्ड 12वीं की परीक्षा दोबारा कराए. फिलहाल अभी इसे लेकर कोई मांग नहीं उठी है पर फुसफुसाहट जरूर शुरू हो गई है.
सीबीएसई की विवादित डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पर खड़े हुए गंभीर और तीखे सवालों के बीच एक बेहद सनसनीखेज आंकड़ा सामने आया है. इस वर्ष परीक्षा में शामिल हुए कुल छात्रों में से हर चौथे छात्र ने बोर्ड से अपनी उत्तर पुस्तिकाओं (Answer Sheets) की स्कैन कॉपी मांग ली है. भारत के किसी भी शिक्षा बोर्ड के इतिहास में यह पहली बार है जब इतनी भारी संख्या में मेधावी छात्रों ने कॉपियों को जांचने की सरकारी प्रक्रिया पर सीधे तौर पर अविश्वास जताया है.
सीबीएसई द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल बोर्ड ने दोनों कक्षाओं (10वीं और 12वीं) की कुल मिलाकर 98 लाख 60 हजार उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन (OSM) किया था. इस पूरी परीक्षा में देश भर से कुल 17.68 लाख स्टूडेंट्स शामिल हुए थे. जैसे ही बोर्ड ने रिजल्ट से असंतुष्ट छात्रों के लिए री-इवैल्युएशन (पुनर्मूल्यांकन) और मार्क्स वेरिफिकेशन का ऑनलाइन पोर्टल ओपन किया, छात्रों की ऐसी बंपर बाढ़ आई कि पोर्टल शुरू होने के शुरुआती 3 घंटे के भीतर ही रिकॉर्ड 1.26 लाख से अधिक आवेदन दर्ज हो गए.
इस भारी लोड का परिणाम यह हुआ कि वेबसाइट पूरी तरह बैठ गई और बोर्ड को अपनी साइट का लाइव डेटा अपडेट करना बंद करना पड़ा. कुल मिलाकर अब तक 4 लाख से अधिक छात्रों ने 11.31 लाख कॉपियों के मार्क्स वेरिफिकेशन और स्कैन कॉपी के लिए आवेदन ठोक दिया है, जो कि कुल परीक्षार्थियों का लगभग 23% से ज्यादा यानी सीधे-सीधे ‘हर चौथा छात्र’ बनता है.
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