भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये पर दबाव के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर भारी असर देखने को मिल रहा है। इस साल सेंसेक्स करीब 12 फीसदी और निफ्टी लगभग 10 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है।
इसी बीच ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट ने भारतीय निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर दुनिया की टॉप 100 कंपनियों में अब एक भी भारतीय कंपनी शामिल नहीं है।
साल 2025 की शुरुआत में Reliance Industries, HDFC Bank और Tata Consultancy Services यानी TCS इस सूची में शामिल थीं, लेकिन अब तीनों कंपनियां टॉप 100 से बाहर हो चुकी हैं।
भारत की सबसे वैल्यूएबल कंपनी Reliance Industries ग्लोबल रैंकिंग में 57वें स्थान से फिसलकर करीब 106वें नंबर पर पहुंच गई है। वहीं HDFC Bank 97वें स्थान से गिरकर 190वें नंबर पर पहुंच गया है। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी TCS भी 84वें स्थान से फिसलकर सीधे 314वें स्थान पर पहुंच गई है।
इसके अलावा Infosys, ITC Limited, Bharti Airtel, ICICI Bank और State Bank of India जैसी बड़ी भारतीय कंपनियों की ग्लोबल रैंकिंग में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2026 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII और FPI भारतीय शेयर बाजार से करीब 2.20 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। सिर्फ अप्रैल महीने में 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली हुई, जबकि मई में अब तक 27 हजार करोड़ रुपये निकाले जा चुके हैं।
अब निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारतीय शेयर बाजार जल्द रिकवरी करेगा या आने वाले दिनों में दबाव और बढ़ सकता है।
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