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अगस्त में भारत की बेरोजगारी दर घटकर 5%, छह महीने के निचले स्तर पर पहुंची
बिज़नेस 1 46 minutes ago

भारत में बेरोजगारी दर को लेकर अगस्त के आंकड़ों में राहत देखने को मिली है। 15 सितंबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में देश की बेरोजगारी दर जुलाई के 5.1 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत हो गई। यह पिछले छह महीनों का सबसे निचला स्तर है।

बेरोजगारी दर में आई इस गिरावट की प्रमुख वजह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति में सुधार बताया गया है। ग्रामीण रोजगार में बेहतर स्थिति ने शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी में हुई मामूली बढ़ोतरी की भरपाई की।

ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी घटी

नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में ग्रामीण बेरोजगारी दर जुलाई के 4.5 प्रतिशत से घटकर 4.1 प्रतिशत हो गई। यह जनवरी के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी का सबसे कम स्तर है।

इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर जुलाई के 6.7 प्रतिशत से बढ़कर 6.8 प्रतिशत हो गई। यानी शहरों में बेरोजगारी में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।

सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की आबादी के लिए बेरोजगारी दर भी फरवरी 2026 के बाद सबसे कम 4.9 प्रतिशत रही।

Worker Population Ratio में भी सुधार

अगस्त में Worker Population Ratio यानी कामकाजी आबादी के अनुपात में भी सुधार देखने को मिला। यह जुलाई के 52.5 प्रतिशत से बढ़कर 52.8 प्रतिशत हो गया। यह मार्च 2026 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

ग्रामीण क्षेत्रों में Worker Population Ratio 55.4 प्रतिशत से बढ़कर 55.8 प्रतिशत हो गया, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह करीब 47 प्रतिशत पर स्थिर रहा।

महिलाओं की कामकाजी भागीदारी बढ़ी

अगस्त के आंकड़ों में महिलाओं की श्रम भागीदारी में भी सुधार दर्ज किया गया। कुल LFPR जुलाई के 34.4 प्रतिशत से बढ़कर 34.8 प्रतिशत हो गया।

ग्रामीण महिलाओं की LFPR 38.8 प्रतिशत से बढ़कर 39.4 प्रतिशत हो गई। वहीं, शहरी महिलाओं की भागीदारी करीब 25.4 प्रतिशत पर स्थिर रही।

3.70 लाख से ज्यादा लोगों को सर्वे में किया गया शामिल

ये आंकड़े Periodic Labour Force Survey के तहत Current Weekly Status के आधार पर जारी किए गए हैं। सर्वे में देशभर के 3,70,160 लोगों को शामिल किया गया था।

इनमें 2,11,353 लोग ग्रामीण क्षेत्रों से और 1,58,807 लोग शहरी क्षेत्रों से शामिल थे।

कुल मिलाकर, अगस्त के आंकड़ों में ग्रामीण रोजगार में सुधार और महिलाओं की श्रम भागीदारी बढ़ने से रोजगार की स्थिति में सकारात्मक बदलाव के संकेत मिले हैं। हालांकि, शहरी बेरोजगारी में मामूली बढ़ोतरी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।

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