11 सितंबर का दिन Neem Karoli Baba के अनुयायियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन वर्ष 1973 में वृंदावन में उन्होंने अपना भौतिक शरीर त्याग दिया था। उन्हें उनके भक्त प्रेम से Maharaj Ji के नाम से भी पुकारते हैं। विभिन्न स्रोतों के अनुसार उन्होंने वृंदावन में लगभग 1:15 बजे रात को शरीर त्यागा। Neem Karoli Baba भगवान Hanuman के अनन्य भक्त और आध्यात्मिक गुरु के रूप में प्रसिद्ध रहे। उनका जीवन प्रेम, करुणा, सेवा और भक्ति के संदेश के लिए जाना जाता है। उनके प्रमुख संदेशों में “Love All, Feed All, Serve All” यानी सभी से प्रेम करना, जरूरतमंदों को भोजन कराना और मानवता की सेवा करना प्रमुख था। उनका सबसे गहरा संबंध उत्तराखंड के Kainchi Dham से माना जाता है, लेकिन वृंदावन भी उनके जीवन और साधना से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान रहा। आज भी उनके अनुयायी देश-विदेश में उनके आश्रमों और उनसे जुड़े स्थानों पर पहुंचकर श्रद्धा व्यक्त करते हैं। उनकी महासमाधि के साथ जुड़ी स्मृतियों में “राम” नाम का जाप भी विशेष रूप से उल्लेखित है। उनके अनुयायियों से जुड़े स्रोत बताते हैं कि अंतिम दिनों में वे नियमित रूप से अपनी डायरी में “राम” नाम लिखा करते थे। Neem Karoli Baba का भौतिक जीवन भले ही 1973 में समाप्त हुआ, लेकिन उनके प्रेम, सेवा और भक्ति के संदेश आज भी उनके अनुयायियों के बीच जीवित हैं। हर वर्ष 11 सितंबर को उनकी महासमाधि को श्रद्धा के साथ याद किया जाता है।
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