इंदौर: घरेलू महिला के काम को कमतर नहीं आंका जा सकता। इसी महत्वपूर्ण टिप्पणी के साथ जिला न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक बीमा कंपनी को मृतका के परिजनों को 51 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाए।
मामला 30 अगस्त 2023 का है। एडवोकेट जगदीश वैष्णव के अनुसार, महिला अपने भाई और पति के साथ मोटरसाइकिल पर घर लौट रही थी। इसी दौरान एक अन्य वाहन चालक की लापरवाही के कारण वह सड़क पर गिर गई और सिर में गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
मृतका के परिजनों ने एडवोकेट जगदीश वैष्णव और अर्पित वैष्णव के माध्यम से जिला न्यायालय में क्षतिपूर्ति का दावा प्रस्तुत किया। बीमा कंपनी ने यह कहते हुए मुआवजा देने से इनकार कर दिया कि महिला गृहिणी थी और उसकी कोई निश्चित आय नहीं थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला दिया गया। अदालत ने इन तर्कों से सहमति जताते हुए महिला की काल्पनिक मासिक आय 30 हजार रुपये निर्धारित की और बीमा कंपनी को 51 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
अदालत ने अपने फैसले में माना कि घरेलू महिला का योगदान परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और भविष्य में उसकी आय अथवा आर्थिक मूल्य में वृद्धि की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
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