पिछले छह महीनों के दौरान भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इस अवधि में बीएसई सेंसेक्स में करीब 11% और निफ्टी 50 में लगभग 8.6% की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में लगातार जारी दबाव के चलते निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ा। युद्ध जैसे हालात और अनिश्चितता के कारण निवेशकों का रुझान जोखिम वाले निवेश से कम हुआ, जिससे भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में रहा।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली, वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी बाजार की चाल को प्रभावित किया।
बाजार में आई गिरावट का असर कई प्रमुख सेक्टरों पर देखने को मिला। विशेष रूप से बैंकिंग, आईटी, ऑटो और मेटल सेक्टर के शेयरों में दबाव बना रहा। हालांकि, कुछ रक्षात्मक सेक्टरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को घबराकर फैसले लेने के बजाय लंबी अवधि की निवेश रणनीति अपनानी चाहिए। वैश्विक परिस्थितियों में सुधार होने पर बाजार में फिर से तेजी लौटने की संभावना बनी हुई है।
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