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शहरों से गायब हो रहे जुगनू और गौरैया चिंता का विषय: सीएम योगी आदित्यनाथ
राजनीति 60 2 months ago

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में प्रकृति का संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है और इसके लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक होना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों से जुगनू, गौरैया और मैना जैसे छोटे जीव-जंतु लगातार गायब होते जा रहे हैं, जो पर्यावरण के लिए चिंताजनक संकेत हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जीव-जंतु खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

सीएम योगी ने जैव विविधता के महत्व को रेखांकित करते हुए सनातन परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में हर जीव को सृष्टि का अभिन्न अंग माना गया है। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि रावण के विरुद्ध युद्ध में वानर, भालू और गिलहरी तक ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था, जो प्रकृति और जीवों के महत्व को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से प्रकृति को करीब से समझने और उसके संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जैव विविधता संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके।

योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में बाघ, तेंदुए और राजकीय पक्षी सारस की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके अलावा प्रदेश के 13 आर्द्रभूमि स्थलों को अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि कई दुर्लभ जीव-जंतु प्रदेश में फिर से दिखाई देने लगे हैं, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक परिणाम हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति के प्रति हमारी जागरूकता ही भविष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा है और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।

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