देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। बीते 10 दिनों में चार बार हुए दामों में इजाफे के बाद पेट्रोल और डीजल 7 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा महंगे हो चुके हैं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई है, जबकि डीजल 95 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है।
ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर अब सिर्फ पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी पर भी साफ दिखाई देने लगेगा। ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (AITWU) ने फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर लागू कर दिया है, जिसके तहत डीजल महंगा होने पर माल ढुलाई की लागत भी बढ़ाई जाएगी।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि ट्रक संचालन की कुल लागत का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ डीजल पर खर्च होता है। ऐसे में डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ेगी और कंपनियां इसका बोझ सीधे ग्राहकों पर डाल सकती हैं।
इसका सीधा असर दूध, सब्जियां, राशन, दवाइयों, ऑनलाइन डिलीवरी और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर पड़ सकता है। क्योंकि देशभर में सामान की सप्लाई ट्रकों के जरिए ही होती है, इसलिए माल ढुलाई महंगी होने से बाजार में वस्तुओं के दाम बढ़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से कमजोर होते रुपये और अब लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम देश में महंगाई के खतरे को और बढ़ा सकते हैं। आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजों से लेकर यात्रा तक, हर खर्च आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है।
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