जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को कंपनियां खर्च कम करने और काम तेज करने का सबसे बड़ा जरिया मान रही थीं, अब वही तकनीक उनके लिए भारी पड़ती नजर आ रही है। माइक्रोसॉफ्ट, उबर और एनवीडिया जैसी बड़ी टेक कंपनियां AI टूल्स के बढ़ते खर्च से परेशान हो गई हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट ने अपने कर्मचारियों को कोडिंग के लिए “Claude Code” जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल करने की सुविधा दी थी। लेकिन कर्मचारियों द्वारा भारी उपयोग के चलते कंपनी का खर्च तेजी से बढ़ गया। हालात ऐसे हो गए कि माइक्रोसॉफ्ट को कई इंजीनियरों का एक्सेस वापस लेना पड़ा और कर्मचारियों को दूसरे AI टूल्स की तरफ शिफ्ट किया जा रहा है।
उबर के CTO प्रवीण नेपल्ली नागा ने भी खुलासा किया कि कंपनी का पूरे साल 2026 के लिए तय AI कोडिंग बजट सिर्फ चार महीनों में खत्म हो गया। कंपनी ने कर्मचारियों को AI इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया था, लेकिन बढ़ती टोकन लागत ने बजट बिगाड़ दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, AI मॉडल हर “टोकन” के हिसाब से शुल्क लेते हैं। जैसे-जैसे AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है, कंपनियों का कंप्यूटिंग खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है। एनवीडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने तो यहां तक कहा कि उनकी टीम में कंप्यूटर चलाने का खर्च कर्मचारियों की सैलरी से भी ज्यादा हो गया है।
गार्टनर और गोल्डमैन सैक्स जैसी रिसर्च कंपनियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI का उपयोग कई गुना बढ़ेगा, जिससे कंपनियों के कुल खर्च में और तेजी आ सकती है।
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