फुटबॉल की दुनिया में सपने सच होने की मिसाल बने केप वर्डे के 40 वर्षीय गोलकीपर वोज़िन्हा। अपने पहले फीफा वर्ल्ड कप मुकाबले में उन्होंने ऐसा प्रदर्शन किया कि यूरोपीय चैंपियन स्पेन भी गोल करने में नाकाम रहा।
स्पेन ने पूरे मैच में 27 शॉट लगाए और लगातार दबाव बनाए रखा, लेकिन वोज़िन्हा और केप वर्डे की मजबूत डिफेंस के सामने उनकी हर कोशिश विफल रही। मुकाबला 0-0 की बराबरी पर समाप्त हुआ, जिससे केप वर्डे ने अपने इतिहास के पहले विश्व कप मैच में यादगार अंक हासिल किया।
मैच खत्म होने के बाद वोज़िन्हा भावुक हो गए और मैदान पर ही उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। यह उनके लंबे संघर्ष और वर्षों की मेहनत का परिणाम था।
इस शानदार प्रदर्शन का असर सोशल मीडिया पर भी देखने को मिला। मैच से पहले इंस्टाग्राम पर उनके करीब 50 हजार फॉलोअर्स थे, लेकिन स्पेन के खिलाफ दमदार खेल के बाद उनकी लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल आया और फॉलोअर्स की संख्या लाखों में पहुंच गई।
वोज़िन्हा का सफर भी बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने 25 साल की उम्र में अपना प्रोफेशनल करियर शुरू किया था और कई बार राष्ट्रीय टीम से संन्यास लेने का विचार भी किया। लेकिन उन्होंने अपने विश्व कप खेलने के सपने को कभी नहीं छोड़ा।
मैच के बाद वोज़िन्हा ने कहा, “मैंने पूरी जिंदगी इसी पल और इसी सपने के लिए मेहनत की है।” अब उनका यह सपना दुनिया के सामने हकीकत बन चुका है।
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