फीफा वर्ल्ड कप 2026 के शुरू होने से पहले एक बड़ा विवाद सामने आया है। अमेरिका ने सोमालिया के अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल रेफरी उमर आर्टन को देश में प्रवेश देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद खेल जगत में बहस छिड़ गई है और इसे खेल तथा राजनीति के टकराव के रूप में देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उमर आर्टन 8 जून को मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे थे। यहां अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा जांच के लिए रोक लिया। करीब 11 घंटे तक पूछताछ के बाद उन्हें अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई और तुर्किये जाने वाली फ्लाइट से वापस भेज दिया गया।
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा जांच के दौरान ऐसी जानकारी सामने आई, जिससे कुछ संदिग्ध आतंकी संगठनों के सदस्यों से उनके कथित संबंधों की आशंका जताई गई। इसी आधार पर अमेरिकी कानून के तहत उन्हें प्रवेश के लिए अयोग्य घोषित किया गया।
इस फैसले से उमर आर्टन का वह सपना टूट गया, जिसमें वे फीफा वर्ल्ड कप में रेफरिंग करने वाले पहले सोमाली अधिकारी बनने जा रहे थे। फीफा के नियमों के अनुसार सभी रेफरी अधिकारियों को टूर्नामेंट से पहले फ्लोरिडा में प्रशिक्षण और सुरक्षा प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। ऐसे में उनके लिए कनाडा या मेक्सिको में भी मैच ऑफिशिएट करना संभव नहीं रह गया।
हालांकि मोगादिशु लौटने पर उमर आर्टन का भव्य स्वागत किया गया। उन्होंने अपने समर्थकों और अधिकारियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि वह इस झटके से निराश नहीं होंगे और 2030 फीफा वर्ल्ड कप में रेफरी के रूप में वापसी करने का प्रयास करेंगे।
इस घटना ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 से पहले नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहां अमेरिका सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता देने की बात कर रहा है, वहीं कई लोग इसे एक प्रतिभाशाली रेफरी के साथ अन्याय मान रहे हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में खेल और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के संबंधों पर नई बहस को जन्म दे सकता है।