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उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर को लेकर बढ़ा विवाद, Uma Bharti ने CM Mohan Yadav को लिखा पत्र
मध्यप्रदेश 6 11 hours ago

मध्य प्रदेश के उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर को लेकर प्रशासन के सामने चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। सिंहस्थ 2028 को लेकर कंठाल से छत्री चौक तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण की योजना में मंदिर प्रभावित हो रहा है। मंदिर को लेकर हिंदूवादी संगठनों और साधु-संतों के विरोध के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री Uma Bharti भी समर्थन में सामने आई हैं।

Uma Bharti ने प्लान बदलने का दिया सुझाव

गुरुवार देर शाम सोशल मीडिया पर सामने आए पत्र में Uma Bharti ने मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav से खड़े हनुमान मंदिर के लिए सड़क निर्माण की योजना में बदलाव करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के साथ धार्मिक स्थलों की गरिमा और लोगों की आस्था का भी ध्यान रखा जा सकता है।

Uma Bharti ने भोपाल में सड़क चौड़ीकरण के दौरान धार्मिक स्थल को प्रभावित किए बिना योजना में बदलाव किए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि विकास और आस्था दोनों को साथ लेकर चलना संभव है। इसी आधार पर उन्होंने उज्जैन में भी वैकल्पिक योजना पर विचार करने का सुझाव दिया।

सांसद Anil Firoziya ने भी जताई चिंता

उज्जैन के सांसद Anil Firoziya ने कहा कि खड़े हनुमान मंदिर का विषय सीधे जनता की आस्था और भावनाओं से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामले में प्रशासन को साधु-संतों, व्यापारियों, मंदिर से जुड़े लोगों, जनप्रतिनिधियों और सर्वसमाज के साथ चर्चा करनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि आगे का कोई भी फैसला सभी संबंधित पक्षों की सहमति से लिया जाए, ताकि धार्मिक भावनाएं आहत न हों।

प्रतिमा की गहराई की जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं

मंदिर के पुजारी Mahesh Bairagi के अनुसार, आसपास की दीवार और गुंबद हटाने के बाद सामने आया कि खड़े हनुमान की प्रतिमा एक विशेष लॉकिंग पद्धति पर टिकी हुई है। प्रतिमा को सीधे उठाने पर उसके विग्रह होकर बिखरने का खतरा बताया गया है।

पुजारी के मुताबिक, इंदौर के विशेषज्ञों और आर्कियोलॉजी विभाग की टीम ने मौके पर जांच की थी। करीब 5 से 6 फीट गहरे गड्ढे भी करवाए गए। विशेषज्ञों ने आधुनिक उपकरणों, जैसे GPR और स्कैनिंग मशीन, से जांच की जरूरत बताई थी। इसके बाद SGSITS और IIT की टीम के भी दौरा करने की बात सामने आई थी।

हालांकि, गुरुवार को मंदिर परिसर में जांच टीम के पहुंचने को लेकर कोई गतिविधि नजर नहीं आई। पुजारी का कहना है कि प्रशासन की ओर से उन्हें जांच टीम के आने की कोई जानकारी नहीं दी गई।

मंदिर हटाने के बजाय दूसरा रास्ता निकालने की मांग

महामुक्तेश्वरी धाम के पीठाधीश्वर पंडित शंकर लक्ष्मी नारायण जोशी ने भी मंदिर को हटाने के बजाय वैकल्पिक रास्ता निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सड़क निर्माण के दौरान किसी अन्य संरचना को बचाकर उसके आसपास से मार्ग निकाला जा सकता है, तो खड़े हनुमान मंदिर के लिए भी ऐसा विकल्प तलाशा जाना चाहिए।

उन्होंने प्रशासन के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया। उनका कहना है कि मौके की स्थिति को देखकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

पुनर्स्थापना के लिए जमीन उपलब्ध, लेकिन मंदिर अभी अधूरा

बताया जा रहा है कि मंदिर प्रबंधन की सहमति के आधार पर वार्ड नंबर 20 में पानी की टंकी हटाकर करीब 20.90 वर्गमीटर जमीन मंदिर की पुनर्स्थापना के लिए उपलब्ध कराई गई है। उज्जैन नगर निगम ने इसके लिए 2 सितंबर को पत्र भी जारी किया था।

हालांकि, प्रस्तावित स्थान पर मंदिर का निर्माण अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है। मंदिर से जुड़े लोगों की ओर से यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि प्रतिमा को वहां स्थापित किया जाता है तो मौजूदा दक्षिणमुखी हनुमान की दिशा बदलकर उत्तरमुखी हो जाएगी।

प्रशासन के सामने आस्था और विकास के बीच संतुलन की चुनौती

खड़े हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। एक तरफ सिंहस्थ 2028 को देखते हुए सड़क चौड़ीकरण का काम समय पर पूरा करने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ मंदिर को विस्थापित नहीं करने की मांग जोर पकड़ रही है।

ऐसे में प्रशासन के सामने सड़क निर्माण और धार्मिक आस्था के बीच ऐसा सर्वमान्य समाधान निकालने की चुनौती है, जिस पर सभी पक्ष सहमत हो सकें।

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