उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए PM-KUSUM योजना सोलर ऊर्जा के जरिए सिंचाई की लागत कम करने का विकल्प उपलब्ध कराती है। योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में डीजल पर निर्भरता घटाना और किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ना है।
सोलर सिंचाई पंप पर सब्सिडी
PM-KUSUM के तहत किसानों को सोलर कृषि पंप लगाने के लिए केंद्र और राज्य स्तर से वित्तीय सहायता दी जाती है। राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार सामान्य राज्यों में केंद्र की सहायता 30% और राज्य सरकार की सहायता कम से कम 30% निर्धारित है। यदि कोई राज्य इससे अधिक सब्सिडी देता है, तो किसान की हिस्सेदारी और कम हो सकती है। इसलिए उत्तर प्रदेश में वास्तविक सब्सिडी योजना की मौजूदा राज्य व्यवस्था और पात्रता के अनुसार तय होगी।
डीजल पर निर्भरता होगी कम
PM-KUSUM का एक प्रमुख उद्देश्य कृषि क्षेत्र का de-dieselisation है। सोलर पंप से किसान सिंचाई के लिए डीजल पर निर्भरता कम कर सकते हैं, जिससे ईंधन पर होने वाला खर्च घटाने में मदद मिल सकती है। योजना के Component-B में मौजूदा डीजल कृषि पंपों को सोलर पंप से बदलने का भी प्रावधान है।
अतिरिक्त बिजली बेचने का भी विकल्प
PM-KUSUM के कुछ घटकों के तहत किसान अपनी जमीन पर ग्रिड-कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट स्थापित कर सकते हैं और अतिरिक्त बिजली स्थानीय DISCOM को बेच सकते हैं। वहीं, कुछ परिस्थितियों में सोलर कृषि पंप को ग्रिड से जोड़कर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में देने की व्यवस्था भी की जा सकती है। इसकी शर्तें और बिजली खरीद की दर संबंधित राज्य और नियामक के नियमों पर निर्भर करती है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है योजना
सोलर सिंचाई से किसानों को डीजल की कीमतों और उपलब्धता पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देता है और लंबे समय में सिंचाई की लागत को नियंत्रित करने का विकल्प देता है।
किसानों को PM-KUSUM के नाम पर चल रही फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहने की भी सलाह दी गई है। योजना का कार्यान्वयन राज्य सरकारों के नामित विभागों के माध्यम से किया जाता है।
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