भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित व्यापार समझौता (Trade Deal) अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण शर्त के कारण इस पर अभी हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि जब तक भारत को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ (आयात शुल्क) का लाभ मिलने की गारंटी नहीं मिलती, तब तक समझौते को अंतिम मंजूरी नहीं दी जाएगी।
भारत चाहता है कि अमेरिका को निर्यात होने वाले वस्त्र, दवाइयों, इंजीनियरिंग उत्पादों और अन्य सामान पर वियतनाम, बांग्लादेश जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम आयात शुल्क लगे। सरकार का मानना है कि इससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
पहले दोनों देशों के बीच 18 फीसदी टैरिफ दर पर सहमति बनी थी, लेकिन भारत का कहना है कि यदि यही या इससे बेहतर रियायत अन्य देशों को भी मिलती है, तो भारतीय उद्योगों को मिलने वाला विशेष लाभ समाप्त हो जाएगा। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था भारत के लिए स्वीकार्य नहीं होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यापार समझौता भारत की शर्तों के अनुरूप पूरा होता है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में नई संभावनाएं मिलेंगी। साथ ही निवेश, व्यापार और आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती मिलेगी। यह समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई दे सकता है।
फिलहाल दोनों देश समाधान तलाशने में जुटे हैं और टैरिफ गारंटी पर सहमति बनने के बाद ही इस बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
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