दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्ध विराम के बाद यह सकारात्मक संकेत सामने आए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है।
डॉनल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बीच ईरान ने यह शर्त मान ली है कि अगर हमले बंद किए जाते हैं, तो वह होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के सुरक्षित गुजरने की अनुमति देगा। इस फैसले को वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।
भारत, जो ऊर्जा आपूर्ति के लिए पश्चिम एशिया पर काफी निर्भर है, ने तुरंत कदम उठाते हुए प्रमुख तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, बीपीसीएल, एचपीसीएल और रिलायंस—को सक्रिय कर दिया है। इन कंपनियों ने सऊदी अरब की अरामको और यूएई की एडनोक जैसे सप्लायर्स से संपर्क कर आपूर्ति बहाल करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
हालांकि, स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है। शिपिंग कंपनियां अब भी इस मार्ग से माल भेजने को लेकर सतर्क हैं और जमीनी हालात का आकलन कर रही हैं। इससे आपूर्ति बहाली की गति धीमी पड़ सकती है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से पूरा करता है—करीब 40% कच्चा तेल, 50% एलएनजी और 90% एलपीजी आयात इसी रास्ते से होता है। ऐसे में इस मार्ग की स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही जहाजों की आवाजाही शुरू हो जाए, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य होने में महीनों लग सकते हैं। क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है, जो भविष्य में फिर से बाधा बन सकता है।
फिलहाल, सप्लाई बहाल होने की उम्मीद से कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। इससे आम लोगों और तेल कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है।
हालात सुधरने की दिशा में जरूर बढ़ रहे हैं, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। अब देखना होगा कि यह युद्ध विराम कितने समय तक कायम रहता है और क्या होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से सामान्य हो पाता है।
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