National Company Law Tribunal (NCLT) की पांच सदस्यीय बेंच ने Zee Group के संस्थापक Subhash Chandra से जुड़े व्यक्तिगत दिवाला मामले में 25 अगस्त को दिए गए आदेश पर रोक लगा दी है। अब इस मामले की नए सिरे से सुनवाई होगी।
NCLT ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए Chandra को मामले की सुनवाई पूरी होने तक अपनी किसी भी संपत्ति को सीधे या परोक्ष रूप से बेचने या ट्रांसफर करने से रोक दिया है।
इस मामले में Subhash Chandra ने creditors को ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत दावों के मुकाबले ₹6.25 करोड़ का भुगतान करने का प्रस्ताव दिया था। इसके अलावा insolvency प्रक्रिया की लागत के लिए ₹25 लाख अलग रखे गए थे।
पहले बेंच के सदस्यों की राय थी अलग
Repayment plan पर सुनवाई कर रही NCLT की दो सदस्यीय बेंच में मतभेद सामने आया था। Judicial Member Ashok Kumar Bhardwaj ने कुछ शर्तों के साथ योजना को मंजूरी देने का समर्थन किया था, जबकि Technical Member Reena Sinha Puri ने resolution process में गंभीर खामियों का हवाला देते हुए योजना को खारिज कर दिया था।
मतभेद के बाद मामला Companies Act, 2013 की Section 419(5) के तहत तीसरे सदस्य Judicial Member Nilesh Sharma के पास भेजा गया था।
25 अगस्त के आदेश पर भी अब रोक
25 अगस्त को Nilesh Sharma ने repayment plan को मंजूरी देने का फैसला सुनाया था। हालांकि, उन्होंने Anil Kumar की ओर से 960 लोगों और Sunil Jain की ओर से 300 लोगों के दाखिल दावों को बाहर रखने का निर्देश दिया था।
अब पांच सदस्यीय बेंच ने कहा है कि पहले के आदेशों में स्पष्ट बहुमत की राय नहीं थी। इसी वजह से मामले को दोबारा सुनने का फैसला लिया गया है।
2022 से चल रहा है मामला
Subhash Chandra के खिलाफ व्यक्तिगत insolvency proceedings की शुरुआत 2022 में हुई थी। Indiabulls Housing Finance ने Vivek Infracon को दिए गए करीब ₹170 करोड़ के कर्ज के मामले में NCLT का रुख किया था। Chandra ने इस कर्ज के लिए personal guarantee दी थी।
अप्रैल 2024 में NCLT ने Chandra के खिलाफ personal insolvency case स्वीकार किया था। Indiabulls Housing Finance का नाम 2024 में बदलकर Sammaan Capital Ltd हो गया।
मामले में आगे NCLT की सुनवाई के बाद यह तय होगा कि प्रस्तावित repayment plan को मंजूरी मिलती है या नहीं।
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