अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो गई है।
जुलाई की शुरुआत से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 20 डॉलर प्रति बैरल की तेजी दर्ज की गई है। वहीं WTI Crude Oil भी लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता तनाव है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति का प्रमुख रास्ता माना जाता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते हमलों और शिपिंग गतिविधियों पर असर के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो भारत सहित तेल आयात पर निर्भर देशों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी, रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी होंगी और आम लोगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट के हालात ही तय करेंगे कि कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ेंगी या बाजार में राहत देखने को मिलेगी। फिलहाल वैश्विक ऊर्जा बाजार और निवेशकों की नजर इस क्षेत्र के घटनाक्रम पर टिकी हुई है।
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