नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को बड़ा झटका देते हुए उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि यह मामला चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा है और इसका समाधान चुनाव याचिका के माध्यम से किया जाना चाहिए।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए अपने रिट अधिकार क्षेत्र का उपयोग करने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव याचिका दाखिल कर फैसले को चुनौती देने की अनुमति दी है।
सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि नामांकन को गलत कानूनी आधार पर और पर्याप्त विचार किए बिना खारिज किया गया। उन्होंने अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी क्योंकि नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त हो रही थी।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अदालत चुनावी प्रक्रिया के दौरान कुछ मामलों में हस्तक्षेप करे और कुछ को चुनाव याचिका के लिए छोड़ दे, तो यह संविधान के अनुच्छेद 329 की भावना के विपरीत होगा। अदालत ने कहा कि नामांकन से जुड़े विवादों का समाधान सामान्यतः चुनाव याचिका के माध्यम से ही किया जाना चाहिए।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश की राज्यसभा की तीनों सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों की जीत लगभग तय हो गई थी। बाद में बीजेपी उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए।
कांग्रेस ने इस मामले में चुनाव आयोग और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि “बीजेपी और चुनाव आयोग की जुगलबंदी ने सीट चोरी की है।” वहीं पार्टी का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन राजनीतिक कारणों से और बिना पर्याप्त कानूनी आधार के रद्द किया गया।
दूसरी ओर बीजेपी का कहना है कि नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में आवश्यक जानकारी नहीं दी गई थी, जिसके चलते नियमानुसार कार्रवाई की गई।
अब कांग्रेस के पास इस मामले में चुनाव याचिका दाखिल करने का विकल्प बचा है, जिसके जरिए वह नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को कानूनी चुनौती दे सकती है।
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