संगीत सम्राट तानसेन भारतीय शास्त्रीय संगीत के शिखर पुरुष थे : मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव
संगीत के सिलसिले का शंखनाद, गान मनीषी की ड्योढ़ी स्वर लहरियों से झंकृत
ग्वालियर। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग के लिए उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा जिला प्रशासन — नगर निगम, ग्वालियर एवं मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के सहयोग से भारतीय शास्त्रीय संगीत का देश का सर्वाधिक प्रतिष्ठित तानसेन समारोह का 101वाँ संस्करण सोमवार की शाम तानसेन समाधि स्थल, ग्वालियर में स्वर लहरियों के साथ आरम्भ हो गया। ऐतिहासिक ग्वालियर दुर्ग से पूरी दुनिया को शून्य का परिचय करा रहे “चतुर्भुज मंदिर” की थीम पर बने भव्य मंच की आभा में पांच दिवसीय इस अंतर्राष्ट्रीय संगीत समागम के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में माननीय मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े।समारोह की अध्यक्षता संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने की। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर एवं विधायक श्री मोहन सिंह राठौर बतौर विशिष्ट अतिथि मंचासीन थे।
शुभारंभ समारोह में अपर मुख्य सचिव, संस्कृति विभाग श्री शिवशेखर शुक्ला भी वर्चुअली शामिल हुए। यहां मुख्य मंच पर संभाग आयुक्त श्री मनोज खत्री, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय, संचालक, संस्कृति श्री एन.पी. नामदेव व उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक श्री प्रकाश सिंह ठाकुर एवं श्री दीपक शर्मा मंचासीन थे।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत अपनी अद्वितीय छाप छोड़ रहा है : डॉ.मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि संगीत की नगरी ग्वालियर में आयोजित होने वाला तानसेन संगीत समारोह प्रदेश व देश का सबसे प्रतिष्ठित समारोह है। संगीत सम्राट तानसेन भारतीय शास्त्रीय संगीत के शिखर पुरुष थे। तानसेन की सुर और तान ने ग्वालियर को दुनिया में अलग पहचान दिलाई। गान महर्षि तानसेन ने अपने गुरू स्वामी हरिदास जी के सानिध्य में संगीत की बारीकियां सीखकर ध्रुपद गायिकी सहित शास्त्रीय संगीत को नए आयाम दिए। तानसेन की ख्याति ऐसी थी कि उन्हें अकबर ने अपने नवरत्नों में शामिल किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैदिक काल से शास्त्रीय संगीत हमारे जीवन और संस्कृति का हिस्सा रहा है। सामवेद इसका साक्षी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में कला व संस्कृति को नए आयाम मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी अद्वितीय छाप छोड़ रहा है। आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है।
राष्ट्रीय तानसेन सम्मान एवं राष्ट्रीय राजा मानसिंह तोमर सम्मान अलंकरण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वर्चुअल मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुए भव्य समारोह में शास्त्रीय संगीत के प्रख्यात गायक पं. राजा काले मुम्बई को वर्ष 2024 एवं विश्व विख्यात संतूर वादक पं. तरुण भट्टाचार्य कोलकाता को वर्ष 2025 के राष्ट्रीय तानसेन सम्मान से अलंकरण से विभूषित किया गया। इसी तरह मण्डलेश्वर की साधना परमार्थिक संस्थान समिति को वर्ष 2024 एवं ग्वालियर की रागायन संगीत समिति को वर्ष 2025 के राष्ट्रीय राजा मानसिंह तोमर सम्मान से अलंकृत किया गया। साधना परमार्थिक संस्था की ओर से श्रीमती प्रेरणा कोल्हटकर एवं रागायन संस्था की ओर से महंत रामसेवकदास जी महाराज ने सम्मान प्राप्त किया। राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण के रूप में ब्रम्हनाद के दोनों शीर्षस्थ साधकों को आयकर मुक्त पाँच – पाँच लाख रूपए की सम्मान राशि, प्रशस्ति पट्टिका व शॉल-श्रीफल भेंट किए गए। इसी तरह संगीत एवं कला के संरक्षण व संवर्धन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहीं दोनों संस्थाओं को भी पाँच – पाँच लाख रूपए की सम्मान राशि, प्रशस्ति पट्टिका व शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रशस्ति वाचन संचालक, संस्कृति श्री एन.पी. नामदेव ने किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी सम्मानित मूर्धन्य संगीत साधकों को बधाई एवं शुभकामनायें दीं। साथ ही कहा कि मध्यप्रदेश सरकार कला, संस्कृति का संरक्षण करते हुए विकास के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में सांस्कृतिक अभ्युदय हो रहा है।
संगीत हमारी परंपरा, हमारी जड़ों व हमारी आत्मा का संवाद : संस्कृति मंत्री
संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा कि तानसेन समारोह उस वैभवशाली सांस्कृतिक परंपरा की सतत यात्रा है, जिसमें पिछले 101 वर्षों से संगीत की आत्मा, रागों की अनुभूति और स्वर की साधना एक सामूहिक तपस्या बनकर प्रवाहमान हो रही है। यह समारोह हमें याद दिलाता है कि संगीत हमारी परंपरा, हमारी जड़ों व हमारी आत्मा का संवाद है। उन्होंने कहा हमारे लिए खुशी की बात है कि ग्वालियर की पुण्य धरा पर आयोजित तानसेन समारोह में आने का अवसर मिला है। तानसेन महोत्सव में जब संगीत के सुर गूंजते हैं तब हम केवल आनंदित ही नहीं होते बल्कि हमें भारतीयता, विवेक और आध्यात्मिक शक्ति का आभास भी होता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी मान्यता है कि स्वर ही ब्रम्ह है और ब्रम्ह ही सत्य है। इसी सत्य को तानसेन ने अपने जीवन, तप और संगीत के स्वरों में मूर्तरूप प्रदान किया। मंत्री श्री लोधी ने इस अवसर पर तानसेन अलंकरण व राजा मानसिंह तोमर सम्मान से विभूषित साधकों का मध्यप्रदेश सरकार की ओर से हार्दिक स्वागत व अभिनंदन कर उन्हें बधाई दी।
ग्वालियरवासियों के लिये आज गौरव का दिन – ऊर्जा मंत्री श्री तोमर
ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ग्वालियरवासियों के लिये आज गौरव का दिन है। खुशी की बात है कि ग्वालियर की धरा पर देश व दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित समारोहों में से एक तानसेन समारोह का आयोजन हो रहा है। उन्होंने सम्मानित कलाकारों का अभिनंदन किया और बधाई दी। कार्यक्रम में विधायक श्री मोहन सिंह राठौर ने भी विचार व्यक्त किए।
गुरू राजा भैया पूछवाले को याद किया
तानसेन अलंकरण से विभूषित प्रख्यात शास्त्रीय गायक पं. राजा काले ने ग्वालियर घराने के मूर्धन्य संगीतज्ञ एवं अपने गुरू राजा भैया पूछवाले को याद किया। साथ ही ग्वालियर घराने की भाव सौंदर्य युक्त गायिकी को यह सम्मान समर्पित किया। उन्होंने तानसेन अलंकरण प्रदान करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार के प्रति आभार भी जताया।
स्मारिका एवं स्वराग दर्शन पुस्तिका का विमोचन भी किया गया
तानसेन समारोह के शुभारंभ अवसर पर अतिथियों द्वारा तानसेन समारोह पर केन्द्रित स्मारिका का विमोचन किया गया। साथ ही ग्वालियर घराने के मूर्धन्य गायक राजा भैया पूछवाले की बंदिशों को संग्रहीत कर प्रकाशित की गई पुस्तिका “स्वरांग दर्शन” का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तिका श्री पी एल गोहदकर एवं श्री बाला साहब पूछवाले द्वारा तैयार की गई है।
ध्रुपद गायन से हुआ मंगलारंभ
संगीत सभा का मंगलारंभ शासकीय माधव संगीत महाविद्यालय, ग्वालियर के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत प्रशस्ति गान और ध्रुपद गायन से हुआ। प्रशस्ति के बोल थे – “ध्रुव कंठ स्वरोद्गार ” और ध्रुपद के भावपूर्ण बोल थे — “महादेव देवन पति” राग विहाग के स्वरों में सजी और चौताल में निबद्ध इस प्रस्तुति में पखावज पर डॉ.तरुणा सिंह, पखावज पर डॉ. प्रणव पराड़कर, डॉ.विनय विंदे, वायलिन पर श्री अंकुर धारकर, श्री अनिकेत तारलेकर ने अपनी संगत से प्रस्तुति को प्रभावशाली बना दिया। इसका संयोजन डॉ. वीणा जोशी ने किया।
माधुर्य से भरे आलाप और जोड़-झाला
इसके पश्चात संध्या के मुख्य आकर्षण एवं वर्ष 2025 के राष्ट्रीय तानसेन सम्मान से अलंकृत पंडित तरुण भट्टाचार्य, कोलकाता मंच पर पधारे। उन्होंने अपने पसंदीदा राग रागेश्री का चयन किया। माधुर्य से भरे आलाप और जोड़-झाला के बाद उन्होंने दो गतों की प्रस्तुति दी। विलंबित गत झपताल में तथा द्रुत लय की गत तीन ताल में निबद्ध थी। तंत्रकारी अंग में रचे-बसे उनके संतूर वादन में हर वह रंग उपस्थित था, जो सीधे श्रोता के अंतर्मन को छू ले। झपताल में विविध लयकारियों ने प्रस्तुति को रसपूर्ण बनाया, तो द्रुत तीन ताल में अति-द्रुत झाले ने समूचे प्रांगण में ऊर्जा और ऊष्मा का संचार कर दिया। तबले पर श्री ज्योतिर्मय रॉय चौधुरी की सशक्त और संवेदनशील संगत ने इस संगीत संवाद को पूर्णता दी।
तारो न तारो थारी मर्जी
अगली प्रस्तुति गायन की रही। डॉ. आभा एवं विभा चौरसिया, इंदौर मंच पर नमूदार हुई। तानसेन समारोह के पूज्य मंच के प्रति अगाध श्रद्धा एवं समर्पण भाव से हाजिरी लगाने आई दोनों गुणी गायिकाएं बहनें हैं। उन्होंने राग कलावती से अपने गायन का आरंभ किया। संक्षिप्त आलाप के बाद उन्होंने इस राग में दो बंदिशें पेश की। एकताल में निबद्ध विलंबित बंदिश के बोल थे – “म्हारे मन लागी ” जबकि तीनताल में निबद्ध द्रुत बंदिश के बोल थे – झनक झनक बाजे पैंजन” – दोनों ही बहनों ने इन बंदिशों को बड़े मनोयोग से गाया। रागदारी से परिपूर्ण गायन से रसिक मुग्ध हो गए। इसी राग में अति द्रुत एक ताल की बंदिश – तारो न तारो थारी मर्जी ” को भी उन्होंने भावपूर्ण अंदाज में पेश किया। गायन का समापन कबीर की रचना “तू तो राम सुमर जग” से किया। इस प्रस्तुति में तबले पर श्री अशेष उपाध्याय और हारमोनियम पर श्री विवेक जैन ने साथ दिया।
शास्त्रीय अनुशासन और भावों की कोमलता
रात के उत्तरार्द्ध में राष्ट्रीय तानसेन सम्मान वर्ष 2024 से अलंकृत पंडित राजा काले की गायिकी ने सुरों को शब्दों का स्नेह दिया। उन्होंने ग्वालियर घराने की गायिकी को अपने गायन के केंद्र में रखा। उनकी स्वर-यात्रा में शास्त्रीय अनुशासन और भावों की कोमलता का सुंदर संतुलन दिखाई दिया। हर तान, हर ठहराव में एक सौम्य गरिमा थी, जिसने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। उन्होंने राग यमन की बंदिशे पेश की जो खासतौर पर ग्वालियर घराने की थी। इसके अलावा उन्होंने भैरवी में टप्पा की प्रस्तुति दी।
16 दिसम्बर की सभाओं में यह प्रस्तुतियाँ होंगीं
प्रातः 10 बजे
भारतीय संगीत महाविद्यालय, ग्वालियर ध्रुपद गायन
सुनील पावगी, ग्वालियर हवाईन गिटार
रीतेश-रजनीश मिश्र, वाराणसी युगल गायन
घनश्याम सिसौदिया, दिल्ली सारंगी
सायं 6 बजे
ध्रुपद केन्द्र, ग्वालियर ध्रुपद गायन
पद्मविभूषण अमजद अली खान एवं अमान-आयान अली खान बंगस, मुम्बई सरोद तिगलबंदी
रसिका गावड़े, इंदौर गायन
पद्मश्री सुमित्रा गुहा, दिल्ली गायन
खबरें और भी हैं...