अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। मिडिल ईस्ट में जारी अस्थिरता के बीच एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने चेतावनी दी है कि यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
ADB के चीफ इकोनॉमिस्ट Albert Park के अनुसार, साल 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। तेल की बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा असर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित तेल और गैस पर काफी हद तक निर्भर हैं।
ADB ने भारत की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) के अनुमान में भी कटौती की है। पहले भारत की GDP ग्रोथ 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान था, जिसे अब घटाकर 6.3 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही महंगाई दर को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। महंगाई का अनुमान 4.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्ट, गैस और खाद की लागत बढ़ेगी। इसका सीधा असर खेती और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है।
आर्थिक जानकारों के अनुसार, यदि मिडिल ईस्ट संकट जल्द नहीं सुलझा, तो आने वाले महीनों में वैश्विक बाजारों में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
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