दुनियाभर के शेयर बाजारों में छाई शांति अब टूट चुकी है और यह साफ हो गया है कि वह सिर्फ एक बड़े तूफान से पहले की खामोशी थी। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के विफल होते ही हालात तेजी से बिगड़ गए हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक बाजारों पर देखने को मिल रहा है।
एशियाई बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जापान का निक्केई 600 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि हांगकांग का हेंगसेंग 400 अंक नीचे आ गया। साउथ कोरिया का कोस्पी भी लाल निशान में कारोबार कर रहा है। यह गिरावट निवेशकों के बीच बढ़ती चिंता और अनिश्चितता को दर्शाती है।
भारतीय बाजार के लिए भी संकेत अच्छे नहीं हैं। गिफ्ट निफ्टी करीब 300 अंक नीचे फिसल गया है, जो आने वाले सत्र में गिरावट का इशारा दे रहा है। शुक्रवार की तेजी पर अब ब्रेक लगने की आशंका जताई जा रही है।
इस उथल-पुथल की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 103 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से सप्लाई पर असर पड़ने का डर है, जिससे कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के कड़े रुख ने हालात को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शांति वार्ता विफल होते ही उन्होंने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी का आदेश दिया है। साथ ही, ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई की भी चर्चा तेज हो गई है।
अगर यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल, निवेशकों की नजरें आने वाले अंतरराष्ट्रीय कदमों पर टिकी हैं, जो आगे की दिशा तय करेंगे।
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