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बजट 2026 से पहले बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम! ₹4 तक एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने की तैयारी में सरकार
बजट 52 3 months ago

 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से पहले आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ने की संभावना है। ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल (JM Financial) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर लागू उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में 3 से 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर सकती है।

📈 राजस्व में होगा ₹70,000 करोड़ का इजाफा

रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले से सरकार को सालाना 50,000 से 70,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा सकता है जब सरकार अपनी राजकोषीय स्थिति (Fiscal Position) को सुधारने के दबाव में है।

सरकार क्यों उठा सकती है यह कदम?

जेएम फाइनेंशियल ने इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए हैं:

  1. कच्चे तेल की गिरती कीमतें: वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) फिलहाल करीब $61 प्रति बैरल के आसपास है। इससे तेल कंपनियों (OMCs) का ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन (GMM) काफी बढ़ गया है। वर्तमान में यह लगभग ₹10.60 प्रति लीटर है, जबकि इसका ऐतिहासिक औसत केवल ₹3.50 प्रति लीटर रहा है।

  2. राजकोषीय घाटे का लक्ष्य: अप्रैल से नवंबर 2025 के दौरान सरकार का राजस्व संग्रह बजट अनुमान का केवल 56% रहा है। FY2026 के लिए 4.4% राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार को फंड की जरूरत है।

⛽ तेल कंपनियों और बाजार पर क्या होगा असर?

एक्साइज ड्यूटी बढ़ने का सीधा असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के मुनाफे पर पड़ेगा।

  • EBITDA पर असर: प्रति लीटर ₹1 के बदलाव से कंपनियों के मुनाफे (EBITDA) में 12% से 17% तक का उतार-चढ़ाव आ सकता है।

  • सबसे ज्यादा प्रभावित: HPCL पर इसका सबसे ज्यादा असर (16.6%) होने का अनुमान है, क्योंकि उसका मार्केटिंग सेगमेंट काफी बड़ा है।

क्विक कैलकुलेशन: ₹1 की बढ़ोतरी = ₹17,000 करोड़

ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, पेट्रोल-डीजल पर केवल ₹1 प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने से सरकारी खजाने में सालाना करीब ₹17,000 करोड़ आते हैं। ऐसे में ₹4 की बढ़ोतरी सरकार के लिए फंड जुटाने का सबसे आसान रास्ता साबित हो सकती है।


निष्कर्ष: हालांकि कच्चे तेल की कीमतें कम होने से जनता को राहत की उम्मीद थी, लेकिन सरकार इस “विंडफॉल मार्जिन” का इस्तेमाल अपने घाटे को कम करने के लिए कर सकती है। अब सबकी नजरें वित्त मंत्री के पिटारे पर टिकी हैं।

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