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Tata Sons में चेयरमैन पद को लेकर खींचतान, N. चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद उत्तराधिकारी की तलाश शुरू
बिज़नेस 6 6 hours ago

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने के फैसले ने कंपनी के बोर्ड में नई चर्चा छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड के सदस्यों के बीच इस बात को लेकर अलग-अलग राय है कि चंद्रशेखरन को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मनाया जाए या फिर उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू की जाए।

चंद्रशेखरन ने बोर्ड को बताया है कि वह 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद तीसरे पांच वर्षीय कार्यकाल के लिए खुद को दोबारा नियुक्ति के लिए पेश नहीं करेंगे। वह 2017 से टाटा संस के चेयरमैन हैं और करीब एक दशक से टाटा समूह का नेतृत्व कर रहे हैं।

बोर्ड में दो राय

रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड का एक वर्ग चाहता है कि चंद्रशेखरन को पद पर बने रहने के लिए फिर से मनाने की कोशिश की जाए। वहीं दूसरा पक्ष उनके फैसले का सम्मान करते हुए उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू करने के पक्ष में है।

यह चर्चा भी सामने आई है कि क्या चंद्रशेखरन के फैसले को लेकर बोर्ड में वोटिंग कराई जा सकती है। हालांकि, बोर्ड से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी चेयरमैन के स्वैच्छिक फैसले को वोट के जरिए बदलना असामान्य होगा।

तीसरे कार्यकाल को लेकर पहले से चल रहा था गतिरोध

चंद्रशेखरन के तीसरे पांच वर्षीय कार्यकाल को लेकर पिछले कई महीनों से चर्चा चल रही थी। उनकी दोबारा नियुक्ति को लेकर सभी सदस्यों की सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद उन्होंने बोर्ड को अपने फैसले की जानकारी दी कि वह आगे के कार्यकाल के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे।

अब टाटा संस के सामने यह सवाल है कि चंद्रशेखरन को रोकने की एक और कोशिश की जाए या नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी शुरू की जाए।

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने उत्तराधिकारी प्रक्रिया शुरू करने को कहा

टाटा संस के प्रमुख ट्रस्टी शेयरधोल्डर्स में शामिल सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने बोर्ड से चंद्रशेखरन के फैसले को स्वीकार करते हुए उत्तराधिकारी चुनने के लिए चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।

टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट इसके दो प्रमुख ट्रस्टी शेयरधोल्डर्स हैं। ऐसे में नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया सामान्य कॉरपोरेट नियुक्ति से अधिक जटिल हो सकती है।

पहली बड़ी लीडरशिप ट्रांजिशन की तैयारी

चंद्रशेखरन के 2017 में चेयरमैन बनने के बाद यह टाटा संस में पहला बड़ा नेतृत्व परिवर्तन होगा। फिलहाल एक तरफ बोर्ड के कुछ सदस्य उन्हें रोकने की संभावना पर विचार कर रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी हो रही है।

आने वाले महीनों में टाटा संस के नेतृत्व को लेकर होने वाले फैसले पर पूरे टाटा समूह और कारोबारी जगत की नजर रहेगी।

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