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एशियन पैरा गेम्स 2026: सचिन खिलारी ने गोल्ड जीतकर रचा इतिहास, शॉट पुट F46 में भारत का क्लीन स्वीप
स्पोर्ट्स 9 2 days ago

भारत के पैरा एथलीट सचिन सरजेराव खिलारी ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की शॉट पुट F46 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर अपना खिताब बरकरार रखा। बुधवार को हुए मुकाबले में भारत ने इस स्पर्धा के तीनों पदक अपने नाम किए। सचिन ने अपने छठे और अंतिम प्रयास में 15.87 मीटर का थ्रो करके स्वर्ण पदक जीता और गेम्स का पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।
अंतिम प्रयास में तोड़ा गेम्स रिकॉर्ड
सचिन खिलारी ने 15.87 मीटर का थ्रो किया, जबकि इससे पहले गेम्स रिकॉर्ड 15.67 मीटर था। भारत के मोहम्मद यासर ने तीसरे प्रयास में 15.06 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता। वहीं, प्रवीण ने 14.94 मीटर का थ्रो करके कांस्य पदक अपने नाम किया।

इस तरह भारतीय खिलाड़ियों ने पोडियम पर तीनों स्थान हासिल कर देश का गौरव बढ़ाया। सचिन ने इससे पहले पिछले एशियन पैरा गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीता था। वह 2024 पेरिस पैरालंपिक में रजत पदक जीत चुके हैं।
महाराष्ट्र के गांव से अंतरराष्ट्रीय सफलता तक का सफर
सचिन खिलारी महाराष्ट्र के सांगली जिले के करगनी गांव के रहने वाले हैं। उन्हें पुणे नगर निगम स्टेडियम में फिटनेस सत्र के दौरान कोच अरविंद चव्हाण ने पहचाना था। शुरुआत में उन्होंने डिस्कस थ्रो और जैवलिन थ्रो का अभ्यास किया।

2012 में सचिन ने ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी स्टेट चैंपियनशिप में जैवलिन थ्रो में 60 मीटर का थ्रो करके स्वर्ण पदक जीता था। 2017 में जयपुर में आयोजित पैरा नेशनल्स में उन्होंने 58.47 मीटर के थ्रो के साथ जैवलिन थ्रो में गोल्ड जीता।
चोट के बाद बदला खेल, शॉट पुट में बनाई पहचान
जैवलिन थ्रो में राष्ट्रीय चैंपियन बनने के बाद सचिन को कंधे में चोट लगी। इसके चलते उन्होंने इस खेल को छोड़ने के बारे में भी सोचा। हालांकि, तत्कालीन राष्ट्रीय कोच सत्य नारायण के प्रोत्साहन से उन्होंने शॉट पुट में अपना करियर आगे बढ़ाने का फैसला किया।

इसके बाद सचिन ने ट्यूनीशिया में आयोजित वर्ल्ड पैरा ग्रां प्री में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की। अब एशियन पैरा गेम्स में रिकॉर्ड थ्रो के साथ खिताब बचाकर उन्होंने एक बार फिर भारतीय पैरा एथलेटिक्स में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है।
क्या है F46 कैटेगरी?
F46 वर्ग उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके एक हाथ में कोहनी के ऊपर या नीचे अंग-विच्छेदन अथवा इसी तरह की ऊपरी अंग संबंधी अक्षमता होती है। खिलाड़ी खड़े होकर थ्रो करते हैं और कूल्हों तथा पैरों की ताकत का उपयोग करते हैं।

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