नेपाल और तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। आपदा के छठे दिन भी राहत और बचाव अभियान जारी है। अब तक 955 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें नेपाल में 939 और तिब्बत में 16 लोगों की जान गई है। वहीं, 4 हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल के आठ जिलों में 939 शव बरामद किए गए हैं। इनमें गोरखा में 65, तनहूं में 38, धादिंग में 55, रसुवा में 23, नवलपुर में 216, नुवाकोट में 35, परासी में 168 और चितवन में 279 शव शामिल हैं।
158 भारतीयों का रेस्क्यू
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, नेपाल में अब तक 158 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। राहत और बचाव अभियान में मदद के लिए भारत की ओर से फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और टनल टेक्निकल टीम भी नेपाल भेजी गई है।
नेपाल की सेना ने रसुवा स्थित पनबिजली सुरंग में भी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, लेकिन सुरंग के अंदर कोई फंसा हुआ व्यक्ति नहीं मिला। इसके बाद इस ऑपरेशन को समाप्त कर दिया गया।
आम बाढ़ नहीं थी आपदा: नेपाल के पीएम
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि पिछले सप्ताह आई बाढ़ सामान्य बाढ़ नहीं थी। उनके मुताबिक, हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के खिसकने की घटनाओं के कारण यह बड़ी आपदा सामने आई। उन्होंने इसे जलवायु परिवर्तन से जुड़े बढ़ते खतरों का संकेत बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने इस मुद्दे को उठाने की बात कही।
भारत ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत एक करीबी दोस्त और साझेदार के तौर पर मुश्किल वक्त में नेपाल के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल के राहत, बचाव और पुनर्वास प्रयासों में मदद के लिए प्रतिबद्ध है।
ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, किसी ग्लेशियर या उसके हिस्से के टूटकर घाटी में गिरने से अचानक बाढ़ और मलबे का तेज बहाव शुरू हुआ। इसका असर उत्तरी नेपाल में करीब 100 किलोमीटर तक देखने को मिला।
सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश जारी
नेपाल में कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगें मलबे और चट्टानों से बंद हो गई हैं। नेपाल आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े करीब 933 लोग लापता हैं। सुरंगों तक पहुंचने के लिए खुदाई करने वाली मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद ली जा रही है।
कई देशों ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की इस भीषण आपदा के बाद कई देशों ने राहत सहायता का ऐलान किया है। ब्रिटेन ने 5 मिलियन पाउंड, कनाडा ने 5 मिलियन डॉलर और अमेरिका ने 3.5 मिलियन डॉलर से अधिक की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। इसके अलावा भारत, चीन, यूएई, कतर, जापान, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रेलिया से भी नेपाल को सहायता मिली है।
काठमांडू के अस्पतालों में लापता लोगों के परिजन तस्वीरों के जरिए अपनों की तलाश कर रहे हैं। तबाही के बीच राहत और बचाव दल लगातार लोगों को सुरक्षित निकालने और लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।
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