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बरगी बांध में शाम को हम जब क्रूज पर सवार हुए थे तब सब कुछ सामान्य था. मैं अपनी पत्नी, समधन और उनके नाती के साथ क्रूज की सवारी का आनंद ले रहा था. शुरुआत में सब ठीक था, फिर करीब सवा छह बजे अचानक मौसम का मिजाज बिगड़ गया. तेज अंधड़ चलने लगा. क्रूज असंतुलित होने लगा और देखते ही देखते क्रूज में पानी भर गया. वह डूबने लगा. उसमें करीब 25 से 30 लोग सवार थे. किसी को कुछ समझ नहीं आया कि क्या हुआ? पत्नी, समधन और उनका नाती पलक झपकते ही आंखों से ओझल हो गए. मैं तो खुद को भी नहीं संभाल पा रहा था. चारों तरफ चीख-पुकार और तेज अंधड़ का शोर था. डूबता क्रूज और मदद की गुहार लगाते लोग थे.
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