Dixon Technologies India के शेयरों में बीते कुछ समय से लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। मंगलवार, 13 जनवरी को शेयर बाजार में डिक्सन टेक्नोलॉजीज के शेयरों में 5 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद कंपनी के शेयर पिछले 18 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।
इस तेज गिरावट का सीधा असर कंपनी के बाजार पूंजीकरण पर पड़ा है। जानकारी के मुताबिक, डिक्सन टेक्नोलॉजीज का मार्केट कैप अब ₹70,000 करोड़ से भी नीचे आ गया है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
डिक्सन टेक्नोलॉजीज के शेयर अपने 52-हफ्तों के उच्चतम स्तर ₹18,471 से अब 40 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुके हैं। साल 2026 में अब तक हुए 9 ट्रेडिंग सेशनों में से 6 में शेयर गिरावट के साथ बंद हुए हैं। मंगलवार को कंपनी का शेयर करीब ₹11,254 के स्तर पर ट्रेड करता दिखा और निफ्टी 500 इंडेक्स का सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर बन गया।
ब्रोकरेज फर्म HSBC ने डिक्सन टेक्नोलॉजीज को लेकर रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि तीसरी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर 2025) में कंपनी का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक,
किसी बड़े ऑर्डर या इवेंट की कमी
मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतें
जॉइंट वेंचर (JV) की मंजूरी में देरी
जैसे कारणों से आने वाले समय में कंपनी के बिजनेस पर दबाव बना रह सकता है।
डिक्सन टेक्नोलॉजीज देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में से एक है। कंपनी मोबाइल फोन, टीवी, एलईडी लाइट्स समेत कई इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स बनाती है। फिलहाल कंपनी को
महंगे कच्चे माल,
नए प्रोजेक्ट्स में देरी,
कुछ सरकारी स्कीम्स के खत्म होने
जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से शेयर पर दबाव दिख रहा है।
हालांकि, बाजार के कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि लॉन्ग टर्म में कंपनी की फंडामेंटल स्थिति अब भी मजबूत बनी हुई है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें, कंपनी के आगामी नतीजों और नए ऑर्डर्स पर नजर बनाए रखें।
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