“मोदी की नसीहत पर विपक्ष का वार!”
देश में आर्थिक अनुशासन और बचत को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील अब सियासी तूफान में बदलती दिखाई दे रही है। पीएम मोदी के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने लोगों से एक साल तक सोना कम खरीदने, पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने, विदेश यात्रा टालने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह दी थी — अब विपक्ष ने तीखा पलटवार शुरू कर दिया है।
लोकसभा में नेता विपक्ष Rahul Gandhi ने एक्स पर सरकार को सीधे निशाने पर लेते हुए लिखा — “ये उपदेश नहीं, नाकामी के सबूत हैं।” राहुल गांधी ने कहा कि 12 साल की सरकार के बाद हालात ऐसे हो गए हैं कि अब जनता को बताया जा रहा है कि क्या खरीदना है, क्या नहीं खरीदना, कहां जाना है और कहां नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर संकट की जिम्मेदारी जनता पर डाल देती है ताकि खुद जवाबदेही से बच सके।
वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा — “चुनाव खत्म होते ही संकट याद आ गया।” अखिलेश ने चेतावनी दी कि इस तरह की अपील से बाजार में डर, मंदी और महंगाई की आशंका बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का काम लोगों में भरोसा पैदा करना होता है, भय और अफरातफरी फैलाना नहीं।
अब इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी भी खुलकर मैदान में उतर आई है। Sanjay Singh ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जनता पहले ही महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है, ऊपर से सरकार त्याग और कटौती की सलाह दे रही है। संजय सिंह ने सवाल उठाया कि आखिर देश को इस स्थिति तक पहुंचाया किसने?
पीएम मोदी की अपील अब सिर्फ आर्थिक सलाह नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। सत्ता इसे जिम्मेदारी और राष्ट्रहित बता रही है, जबकि विपक्ष इसे सरकार की आर्थिक विफलता का संकेत बताकर जनता के बीच बड़ा मुद्दा बनाने में जुट गया है।
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