अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने भारत के लिए बड़ा वित्तीय अलर्ट जारी किया है। IMF के मुताबिक, अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है और कच्चे तेल की कीमतों में इसी तरह तेजी बनी रहती है, तो भारत में महंगाई, राजकोषीय घाटा और सार्वजनिक कर्ज तेजी से बढ़ सकता है।
दरअसल, अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 फीसदी तक उछाल देखा गया है। हालात ऐसे हैं कि तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें अब भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं।
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से ट्रांसपोर्ट, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
IMF ने चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो लोगों की खर्च करने की क्षमता कमजोर हो सकती है और गरीबी बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है। साथ ही सार्वजनिक कर्ज और राजकोषीय दबाव बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने सरकार को सलाह दी है कि व्यापक ईंधन राहत देने के बजाय कमजोर परिवारों और छोटे कारोबारियों को अस्थायी सहायता दी जाए। IMF के अनुसार, सही नीति और संतुलित आर्थिक कदम ही इस संकट के प्रभाव को कम कर सकते हैं।
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