दुनिया के बड़े तेल निर्यातकों में शामिल रूस को अब भारत से पेट्रोल आयात करना पड़ रहा है। यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के कारण रूस की कई प्रमुख रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचा है, जिससे घरेलू पेट्रोल सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 अगस्त को रूस को गुजरात के वाडिनार स्थित नायरा एनर्जी से करीब 42 हजार टन पेट्रोल की पहली खेप मिली। नायरा एनर्जी में रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की करीब 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
रूस को क्यों पड़ रही पेट्रोल की जरूरत
यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस की कई रिफाइनिंग यूनिट्स को प्रभावित किया है। इसके चलते घरेलू स्तर पर कच्चे तेल की प्रोसेसिंग क्षमता कम हुई और पेट्रोल की उपलब्धता पर असर पड़ा।
रूस ने भारत के अलावा बेलारूस और कजाखस्तान से भी पेट्रोल आयात शुरू किया है। घरेलू बाजार में सप्लाई बनाए रखने के लिए रूस ने पेट्रोल निर्यात पर प्रतिबंध भी बढ़ाया है। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल की कमी और राशनिंग की खबरें सामने आई हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह खबर
इस घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू भारत और रूस के बीच तेल व्यापार है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है और अपनी रिफाइनरियों में उसे प्रोसेस करके पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पाद तैयार करता है।
अब स्थिति यह है कि रूस भारत को कच्चा तेल बेच रहा है और भारत उसी रूस को रिफाइंड पेट्रोल भेज रहा है।
यह घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलते समीकरण को दिखाता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि केवल कच्चे तेल का बड़ा उत्पादक और निर्यातक होना पर्याप्त नहीं है। पर्याप्त रिफाइनिंग क्षमता जरूरी है, क्योंकि रिफाइनिंग में बाधा आने पर तेल निर्यातक देश को भी पेट्रोल जैसे तैयार ईंधन का आयात करना पड़ सकता है।
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